Saturday, 22 August 2020

Bhajan (Devotional Song) : हे गणनायक , तुम प्रभू विशेष


हे गणनायक , तुम प्रभू विशेष



हे गणनायक , तुम प्रभू विशेष
आरती करूं मैं, हे गणेश
रिद्धि-सिद्धि के, तुम हो स्वामी
प्रथम पूज्य तुम, अन्तर्यामी
विनती करता जो, तुम्हारी
रहे, ना उसकी बाधा शेष
हे गणनायक , तुम प्रभू विशेष
आरती करूं मैं, हे गणेश
तात महादेव, पार्वती माता
जन जन तुमको, शीश नवाता
भक्त तुम्हारा, ध्यान जो धरता
उसके, दुःख ना रहते शेष
हे गणनायक , तुम प्रभू विशेष
आरती करूं मैं, हे गणेश
तुम हो, बुद्धि -ज्ञान के दाता
सुख-समृद्धि, सब तुम से आता
कृपा तुम्हारी, जो मैं भी पाता
जीवन में कुछ ना, रहता शेष
हे गणनायक , तुम प्रभू विशेष
आरती करूं मैं हे गणेश

आप सभी को गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ🙏🏻 🕉️ 🙏🏻

💐 गणपति बप्पा मोरया 💐

Friday, 21 August 2020

अनहद नाद (भाग -5)

 अब तक आप ने पढ़ा, अनहद नाद (भाग-1), अनहद नाद (भाग -2), अनहद नाद (भाग-3) व अनहद नाद (भाग -4).....

अब आगे........

 अनहद नाद (भाग - 5)


आंटी का हाथ थामे बाहर निकलेI मेरे क़रीब आयेI

मैं शून्य थीI मेरी आँखें नम थींI अंकल ने मेरे सिर पर हाथ रखाI उनका हाथ रखते ही मेरा दिल भर आयाI मैं कुछ कह पाती उससे पहले ही वो बोल पड़े-

“ये हमारी ज़िन्दगी का तीसरा दौर शुरू I”

और फिर वो अपने घर से दूर बाहर गेट की तरफ़ चल दिएI सबसे वैसे ही मिले जैसे रोज़ हँसते-मुस्कुराते हुए मिलते थेI किसी को भनक भी नहीं लगी कि पिछली रात उनके साथ क्या हुआ और अगली बार वो कब मिलेंगेI अब उनके चेहरे पर वो तनाव नहीं था, वो हताशा नहीं थेI वो आंटी जी का हाथ थामे अपनी ज़िन्दगी के तीसरे पड़ाव की ओर चल दिएI  मैं उन्हें जाते हुए तब तक देखती रही जब तक वो मेरी आँखों से ओझल नहीं हो गएI

मैंने वापस अपने घर की ओर रुख किया तो महसूस किया कि मैं चल नहीं पा रहीI मेरे पैर डगमगा रहे थेI किसी तरह मैं लडख़ड़ाते हुए अपने घर के दरवाज़े तक पहुँची और दरवाज़ा खटखटायाI

 मेरी छोटी बहन ने दरवाज़ा खोलाI मैं अंदर गईI देखा माँ खाना बना रहीं हैं,  पिताजी अख़बार पढ़ रहे हैं, बड़ा भाई चाय पी रहा है और छोटी बहन चहल पहल कर रही हैI

 मैं चारों तरफ़ अपने रिश्तों को सवालिया नज़र से देख रही थी और अपने विश्वास को ढूँढ रही थीI

 मैं किसी से कुछ कहे बिना अपने कमरे में आ गईI बेचैन मन से बिस्तर पर लेट गईI मुझे अब नींद नहीं आ रही हैI  बस अंकल की कही बातों ने मेरे दिलो दिमाग़ पर एक छाप छोड़ दीI

उनके विश्वास और दिल के टूटने की आवाज़ मैं अभी भी महसूस कर रही हूँI

 क्या सच में अपने लिए जीयूं, अपनों के लिए नहीं…………..?

Disclaimer:

इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय इस blog (Shades of Life) के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों। कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और यह blog उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं रखता है।


Thursday, 20 August 2020

अनहद नाद( भाग - 4)

 अब तक आप ने पढ़ा, अनहद नाद (भाग-1), अनहद नाद (भाग -2) व अनहद नाद (भाग- 3).....

अब आगे........

अनहद नाद (भाग -4)


उन्होंने जवाब दिया- “इसका अर्थ है कि अब मैं कहीं भी रह सकता हूँI कहीं भी सो सकता हूँI सारा जहान मेरा है, 

सिवाय वीरेंद्र की ज़िन्दगी केI”

फिर कुछ देर के लिए ख़ामोशी छा गईI 

मैं उठी और अपने बैग से पानी की बोतल निकालकर अंकल की तरफ़ बढाईI

 उन्होंने पानी का एक घूंट पिया और बोतल को अपने सिराहने रख लिया I जैसे ही मैं उनके सामने बैठी फिर मेरा सवाल-

“अंकल घर तो आपका है न?”

मेरा सवाल अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि उन्होंने बीच में रोकते हुए....

 कुछ पन्नें मेरे सामने रख दिएI मैं एक-एक पन्ना पढ़ती गयी और पलटती गयीI मुझे मेरे सवालों के जवाब मिल चुके थेI

वो पन्नें चीख-चीख कर कह रहे थे कि ‘अपने लिए जियो पर अपनों के लिए मत जियोI’

धोखे से वीरेंद्र अंकल ने कौशिक अंकल का सब कुछ अपने नाम कर लिया थाI कौशिक अंकल और आंटी से उनकी छत तक भी छीन ली थी, उन्हें इस संसार में अकेला कर दियाI

मेरे मन में यही आ रहा था कि कोई अपना भी इस हद तक नीचता पर उतर सकता है!

मैं अंकल से कुछ कह पाती इतने में चिड़ियों की चहचहाहट ने हमारा ध्यान भंग किया तो मैंने महसूस किया कि भोर हो चली हैI आसपास फिर से ज़िन्दगी की चहल पहल शुरू हो गयीI

अंकल उठे, अंदर गए........

आगे पढ़े अंतिम भाग, अनहद नाद ( भाग -5)


Disclaimer:

इस पोस्ट में व्यक्त की गई राय लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं। जरूरी नहीं कि वे विचार या राय इस blog (Shades of Life) के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों। कोई भी चूक या त्रुटियां लेखक की हैं और यह blog उसके लिए कोई दायित्व या जिम्मेदारी नहीं रखता है।