Thursday, 21 January 2021

Story of Life : यह कैसा प्यार (भाग-7)

यह कैसा प्यार (भाग-1), 

यह कैसा प्यार (भाग -2),

यह कैसा प्यार (भाग - 3),

यह कैसा प्यार ( भाग -4) ,

यह कैसा प्यार (भाग-5) और

यह कैसा प्यार (भाग -6) के आगे.....


यह कैसा प्यार (भाग-7)




अब तो ऋषि को भी लगने लगा कि उसको भ्रम रहने लगा है। क्योंकि जो उसे दिखता है, वो ना तान्या को दिखता है ना रोहित को। 

उसे भी सिर्फ साया दिखाई देता है और आवाजें सुनाई दे रही थी, पर साक्षात् कुछ नज़र नहीं आता था।

इन सब के चलते ऋषि धीरे-धीरे मानसिक रूप से बीमार होता जा रहा था जिसके कारण वह business पर ठीक से ध्यान नहीं दे पा रहा था, तो वो धीरे-धीरे रोहित की partnership बढ़ाता गया।

अब partnership ऐसी थी कि, ऋषि 30% और रोहित 70% का partner हो गया था।

ऋषि ने ठीक होने के लिए दवाइयाँ भी लेनी शुरू कर दी।

पर उन दवाइयों का नशा ऐसा था कि वो 24 घंटे में से 16 ‌घंटे पूरी तरह झूमता ही रहता है। क्योंकि उसे पता ही नहीं चला था कि कब तान्या ने उसे दवाइयों के साथ drugs भी देनी शुरू कर दी।

ऋषि के पापा जी का एक दिन फोन आया, तो उन्हें ऋषि की तबीयत का पता लगा, वो फ़ौरन ऋषि से मिलने पहुँच गए।

जब ऋषि के पिता घर में आए, उस समय ऋषि रोहित के साथ doctor के पास गया था। 

तान्या नहीं चाहती थी कि वो ऋषि से मिलें, तो उसने पिता जी को यह कहकर वापस जाने को बोल दिया कि ऋषि business के सिलसिले में abroad गया है।

वो जाने लगे, तब तक ऋषि doctor के पास से लौट आया था। अपने पिता जी को देखकर वो बहुत खुश हुआ।

उसके पिता जी दो दिन रुके। इन दो दिनों में उसे कोई साया नहीं दिखा और कोई आवाज़ भी नहीं सुनाई दी। इसलिए उसने कोई दवा नहीं खाई। 

फिर भी उसकी स्थिति में सुधार आने लगा। ऋषि की स्थिति में सुधार देखकर पिता जी बोले बेटा, मेरे पेंशन लेने जाने का दिन आ गया है। तो मुझे जाना होगा, तू भी साथ चल। 

अब तो रोहित business संभाल रहा है तो तुझे उसकी भी कोई चिंता नहीं है।

ऋषि बोला, पिता जी आप चलिए। मैं दो दिन में आता हूँ। अबकी जब आऊंगा तो बहुत दिनों के लिए आऊंगा। माँ जी और भाभी से बोल दीजिएगा कि खूब सारे पकवान बनाकर रखें, अपने लाडले के लिए।

पिता जी को छोड़कर जब वो लौट कर आया, तो उसे अपने bedroom से आवाजें आती सुनाई दी।

उसने घर के बाहर से ही झांक कर देखा, तो अन्दर का दृश्य देखकर वो हैरान रह गया......

आगे पढ़ें यह कैसा प्यार (भाग - 8) में.....

Wednesday, 20 January 2021

Story of Life : यह कैसा प्यार (भाग-6)

यह कैसा प्यार (भाग-1), 

यह कैसा प्यार (भाग -2),

यह कैसा प्यार (भाग - 3),

यह कैसा प्यार ( भाग -4) और 

यह कैसा प्यार (भाग-5) के आगे.....

यह कैसा प्यार (भाग-6)



तान्या, मैंने रोहित को अपने बंगले में रहने को बोल दिया है ।

ओफ्फो ऋषि तुम्हें कभी अक्ल नहीं आएगी, क्यों कहा तुमने उससे? हम दोनों के बीच वो भी आ जाएगा।

अरे यार वो अकेला feel कर रहा था, फिर हमारा इतना बड़ा बंगला है, उसके outhouse में ही रह लेगा। 

Outhouse में?.....

क्यों तुम्हें अब उसमें भी परेशानी है?

नहीं, कोई परेशानी नहीं है, outhouse में शायद उसे बुरा लगे।

अब जब बोल ही दिया है, तो उसे हमारा तीसरा bedroom ही दे देना।

शाम को रोहित अपने सामानों के साथ बंगले पर पहुंच गया। रोहित पूरे बंगले को ऐसे देख रहा था, जैसे कुछ समझने या याद करने की कोशिश कर रहा हो।

तान्या ने बहुत ख़राब मन से रोहित को तीसरा bedroom दे दिया‌।

अब तो ऋषि और रोहित का साथ, दिन रात का रहने लगा।

सब कुछ अच्छे से चल रहा था, हाँ तान्या जरुर चिढ़ती रहती थी।

एक शाम को ऋषि को बंगले पर कुछ साया सा दिखा, ऋषि ने पीछा किया पर कोई नहीं दिखा।

फिर जब वो तान्या और रोहित के संग खाना खा रहा था,  उसने साफ़ साफ़ देखा, पर्दे के पीछे कोई है।

पर रोहित और तान्या ने कहा, वहांँ कोई नहीं है।

ऋषि ने उठकर देखा, पर वहाँ, सच में कोई नहीं था।

अब तो आए दिन, ऋषि को कभी आवाजें आती, कभी कोई दिखता। 

पर रोहित और तान्या, हमेशा यही कहते, उसका भ्रम है। और देखने पर ऋषि को कुछ दिखता भी नहीं।

ऋषि को भी अब......

आगे पढ़ें, यह कैसा प्यार (भाग-7) में.......

Tuesday, 19 January 2021

Story of Life : यह कैसा प्यार (भाग -5)

यह कैसा प्यार (भाग-1), 

यह कैसा प्यार (भाग -2),

यह कैसा प्यार (भाग - 3) और 

यह कैसा प्यार ( भाग -4) के आगे.....


यह कैसा प्यार (भाग -5) 



एक दिन रोहित ने, ऋषि से आकर कहा, मैं अब और तुम्हारे साथ काम नहीं कर पाऊंगा।

ऋषि बोला, ऐसी भी क्या बात हो गई है? हम दोनों के साथ से हमारा business कितना अच्छा चल रहा है।

हमारा business? रोहित ने चौंकते हुए पूछा।

हाँ, रोहित मैंने कल ही सोचा था कि, तुम्हें अपने business के 30% की partnership दें दूँ।

क्या कह रहे हो ? ऋषि तुम अभी मुझे जानते ही कितना हो? अभी कुछ दिन पहले ही तो मैं तुमसे मिला हूँ।

इतनी जल्दी किसी पर इतबार नहीं करते हैं दोस्त।

ऋषि बोला वाह, दोस्त भी कहते हो, और इतबार करने को भी मना करते हो।

तुम ने मुझ पर भरोसा करके मुझे रुकने को मजबूर कर दिया है, पर मैं अकेले घर में रहते रहते bore हो गया हूँ। मैं वापस अपनों के बीच में जाना चाहता हूँ। रोहित एक सांस में बोल गया।

अरे, मेरे रहते तुम कैसे अकेले हो गये?

 तुम एक काम करो, मेरा बंगला बहुत बड़ा है, तुम हमारे साथ ही रहने लगो। दिन रात का साथ हमारे business development में चार चांद लगा देगा। और तुम्हें अकेलापन भी नहीं सताएगा।

तुम्हरा बंगला!..... 

अरे कहाँ खो गये रोहित? ऋषि ने रोहित को झकझोरते हुए कहा, मैं अपने बंगले पर ही रहने की बात कर रहा हूँ।

रोहित चौंकते हुए बोला, नहीं कुछ नहीं, कुछ पुरानी यादों में खो गया था। 

ओह पुरानी यादें! सच यह कभी साथ नहीं छोड़ती हैं, कहकर आज ऋषि को बहुत दिनों अपने घर वाले याद आने लगे।

रोहित तुम हमारे साथ रहो और एक हफ्ते के लिए तुम और एक हफ्ते के लिए मैं अपने घर वालों से मिलने चले जाएंगे।

घर में सब कितने खुश होंगे, मुझे देख कर। जब से तान्या से मिला हूँ, तब से एक बार ही गया था, दो दिन के लिए सबसे मिलने। 

फिर तो तान्या ने वापस बुला लिया था और business की चिंता भी सता रही थी।

पर अब जब तुम हो तो मुझे किसी बात की फ़िक्र नहीं है।

एक बार, तान्या से पूछ लेते ऋषि।

तान्या से क्या पूछना, तुम तो उसके childhood friend हो, वो तो बल्कि खुश हो जाएगी जानकर कि हम सब साथ में रह रहे हैं।

Childhood friend.... ओ हाँ, वही तो हूँ मैं।

क्यों कुछ ग़लत कहा, मैंने? ऋषि ने पूछा।

अरे नहीं,..... सब ठीक है। चलो मैं चलता हूँ, आज शाम ही सामान के साथ पहुंचाता हूँ, तुम्हारे..... बंगले पर।

ऋषि को रोहित का आज behaviour कुछ अजीब सा लग रहा था।

उसने तान्या को phone कर दिया.....

आगे पढ़ें, यह कैसा प्यार (भाग- 6) में