आज नवरात्रि पर्व की नवमी में माँ के श्रीचरणों में यह भजन समर्पित कर रहे हैं।
हे मातारानी, हम सब पर अपनी कृपादृष्टि सदैव बनाए रखें!
माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैंं
बिन पानी के नाव खे रही हैं,
माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।
मेरा छोटा-सा घर, महलों की रानी हैं माँ।
मेरी औकात क्या महारानी हैं माँ।
फिर भी साथ मेरे रह रही हैं,
माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।।
भूखा उठता हूँ मैं, भूखा सोता नहीं।
दुःख मुझ पर पड़े, तब भी रोता नहीं।
दिन-रात खबर ले रही हैं,
माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।।
माँ के भक्त हैं एक से एक बड़े।
उनके चरणों में कंकड़ के जैसे पड़े।
फिर भी दर्शन मुझे दे रही हैं,
माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।।
कहना चाहूँ बहुत, कह पाता नहीं।
उनके बिना तो अब, रह पाता नहीं।
दिल से आवाज़ यह आ रही है,
माँ नसीबों से ज़्यादा दे रही हैं।
पूरे भजन का video YouTube पर देखने के लिए link पर click करें-

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