Saturday, 7 November 2026

India's Heritage : छोटी दिवाली को रूप चौदस क्यों?

(I) Chhoti Diwali :

आज दीपोत्सव पर्व का दूसरा दिन है, इसे छोटी दीपावली, नरक चतुर्दशी या रूपचौदस भी कहा जाता है।

पर क्यों कहते हैं रूप चौदस? और क्यों है दीपावली पर्व पर साफ़-सफ़ाई का प्रावधान?

आज India's Heritage segment में इसे ही share कर रहे हैं…

छोटी दिवाली को रूप चौदस क्यों?


(II) Present-day Rituals :

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रूप चौदस (जिसे नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली भी कहते हैं) होता है।

इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन सौंदर्य, आरोग्य और शुद्धि पाने के लिए उबटन लगाकर स्नान (अभ्यंग स्नान) करने की विशेष परंपरा है।


(III) The Legends :

पर इसके पीछे का कारण क्या है?

इसके पीछे की कुछ पौराणिक कथाएँ और मान्यताएँ हैं।

  • प्रभु श्रीकृष्ण- भगवान श्रीकृष्ण ने जब नरकासुर का वध किया था, तब युद्ध के बाद उनके शरीर पर रक्त और धूल के छींटे लग गए थे। इसके बाद उन्होंने तेल और उबटन लगाकर स्नान किया था, जिससे उनका रूप फिर से निखर गया था। इसे ही मुख्य कारण माना गया है।
  • राजा हिरण्यगर्भ- एक पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यगर्भ नामक राजा राजपाट त्यागकर तपस्या में लीन हो गए थे, जिससे उनका शरीर जीर्ण-शीर्ण और काला पड़ गया था। देवर्षि नारद के कहने पर उन्होंने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उबटन लगाकर स्नान किया और भगवान कृष्ण की आराधना की, जिससे उनका रूप और स्वास्थ्य पुनः सुंदर हो गया।


(IV) The Preparation :

दीपावली के ठीक एक दिन पहले मनाए जाने वाले इस पर्व पर माँ लक्ष्मी के स्वागत से पहले शरीर और घर की शुद्धि की जाती है, इसलिए इसे रूप चौदस या रूप चतुर्दशी कहा जाता है। माँ लक्ष्मी हमारे घर आकर सुख-समृद्धि बरसाएँ, इसलिए ही दीपोत्सव पर घर और शरीर की साफ-सफाई का प्रावधान है।

आप सभी को रूप चौदस पर्व पर विशेष शुभकामनाएँ!

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