Friday, 27 June 2025

Story of Life : प्यार पर घात (अंतिम भाग)

श्लोक ने श्वेता को बाहों में भर लिया, आहा! क्या बात है madam, बिजली गिरने के mood में हैं। Coffee पीने चलें?

ओह! क्यूं आज आपकी स्नेहा ने coffee पीने से मना कर दिया था, जो जल्दी चले आए और coffee पीने चलने की बात कर रहे हो... श्वेता ने श्लोक की बाहों से छिटक कर बोला...


प्यार पर घात (भाग-1),

प्यार पर घात (भाग-2),

प्यार पर घात (भाग-3) और 

प्यार पर घात (भाग-4) के आगे…

प्यार पर घात (अंतिम भाग)


स्नेहा... श्लोक बहुत जोर-जोर से हंसने लगा...

स्नेहा नहीं, महेश... हंसते-हंसते श्लोक ने कहा।

महेश!! क्या मतलब? श्वेता ने पूछा 

अरे, मैं तो bore हो गया एक महीने तक रोज़-रोज़ एक घंटा महेश के साथ बैठकर...

तुम क्या बोल रहे हो, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है।

आओ, पहले मेरे नजदीक तो आओ...

नहीं, दूर ही रहकर बताओ, गुस्से से भरी श्वेता बोली...

अरे, तुम्हें याद है वो दिन, जिस दिन मैंने तुम्हारे बेडोल शरीर के विषय में comment किया था? 

कैसे भूलूंगी, तुम्हारा वो दंश...

हाँ, उस दिन मैं आवेश में बोल गया था, उसका मुझे अफसोस भी हुआ, कि मैं यह क्या बोल गया?

अच्छा, अफसोस हुआ था, ऐसा लगा तो नहीं था उस दिन..

हुआ था, मैं तुम्हारे पास तुम से माफी मांगने भी आने वाला था कि तभी एक विचार ने मुझे रोक लिया?

अच्छा वो क्या? श्वेता का ग़ुस्सा, कौतूहल में बदल रहा था। 

वही जो मैंने किया...

और क्या किया तुमने?

मैंने एक गुलाबी खूशबूदार काग़ज़ अपनी जींस में रखा, स्नेहा के नाम प्रेम अनुरोध लिखकर, जो तुम देख सको...

और तुम्हें कैसे पता, मैंने देख लिया है?

क्योंकि अगले दिन जेब में दस का सिक्का नहीं था।

बस उसी दिन से मैंने रोज़ महेश के साथ एक घंटा गुजराना या यूं कहूं, झेलना शुरू कर दिया...

पर क्यों किया, यह सब?

श्लोक, श्वेता का हाथ पकड़कर आईने के सामने ले गया और बोला, देखो, अपनी प्यारी sweetheart श्वेता को वापस पाने के लिए...

पिछले एक महीने अपना पूरा ध्यान रखने के कारण, श्वेता पहली-सी निखर गई थी।

अच्छा, तो तुमने मेरे प्यार पर घात नहीं किया?

सोच भी नहीं सकता, श्लोक की आंखों में प्यार और सच्चाई थी।

तो फिर वो गुलाबी खूशबूदार काग़ज़, आज भी तुम्हारे पास होगा...

बिल्कुल है, कहकर उसने वो कागज श्वेता के हाथ में थमा दिया।

साथ ही कहा, मुझे माफ़ कर देना श्वेता, उस रात के लिए और पूरे महीने के लिए भी... क्योंकि तुम्हें तुम से वापिस मिलाने के लिए, मेरे पास कोई और उपाय नहीं था।

मुझे फ़र्क नहीं पड़ता, तुम जैसी भी हो, मेरी हो, और मुझे बहुत खूबसूरत ही लगती रहोगी।

पर तुम्हारे अंदर की वो कुंठा, जो तुमने शौर्य के होने के बाद कही थी, उसे ठीक करना था।

जिसके लिए तुमने दो-चार बार प्रयास भी किया, पर पूरी लगन से नहीं और अंत में छोड़ भी दिया.. 

मुझे लगा कि अगर तुम्हारे प्यार पर घात लगा, तो शायद तुम अपना ध्यान रखना शुरू कर दो, और वही हुआ...

पुरानी श्वेता वाला, सुडौल, छरहरा शरीर, बहुत नाज़ुक और खूबसूरत, glow करने वाला confident चेहरा वापिस आ गया था।

आईना देखते हुए श्वेता अपने आप को देखकर अपने प्यारे श्लोक पर निहाल हो गई, जिसे वो प्यार पर घात समझ रही थी, वो तो उसे उससे मिलाने की कोशिश थी।

श्वेता, आगे कभी मत समझना कि मैं हमारे प्यार पर घात कर सकता हूं, मेरी श्वेता के आगे, सारे पानी भरते हैं। श्लोक ने श्वेता का मुंह अपने हाथों में लेकर कहा...

नहीं, कभी नहीं‌ मुझे मुझसे मिलाने के लिए, बहुत सारा धन्यवाद...

बस धन्यवाद?

श्वेता प्रेम से अभिभूत श्लोक की बाहों में समा गयी।

Thursday, 26 June 2025

Story of Life : प्यार पर घात (भाग-4)

ओह! श्लोक बाबू, स्नेहा से दिल लगा बैठे थे, तभी मुझे जलीकटी सुना रहे थे...

हाय! अब मेरा और मेरे बच्चों का क्या होगा, निर्मोही श्लोक पर सारी जवानी तबाह कर दी। अब जैसी वो दिखती है, ऐसे में कौन उसे पूछेगा?

उसने भारी मन से फोन करके office से तीन दिन की छुट्टी ले ली। 

वो पूरे दिन अनमनी सी रही... रो-रोकर उसकी आंखें लाल हो गई थीं...


प्यार पर घात (भाग-1),

प्यार पर घात (भाग-2) और

प्यार पर घात (भाग-3) के आगे…

प्यार पर घात (भाग-4)


हे भगवान! लगता है स्नेहा ने श्लोक का प्रेम अनुरोध स्वीकार कर लिया... 

श्वेता को बहुत अफसोस हुआ कि उसने अपने पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया, क्यों अपने प्यार पर घात करा दिया?

रात भी उससे ठीक से खाना नहीं खाया गया।

पर अगले दिन से उसने office join कर लिया, आखिर कितने दिन की छुट्टी लेती और किसके लिए?

Office तो उसने ज़रूर join कर लिया था, पर मन उसका टूट गया था। तो वो गुमसुम-सी अपने काम में लगी रहती। 

खाना उससे खाया नहीं जा रहा था तो शरीर में ताकत बनाए रखने के लिए वो नींबू पानी, सूप, सलाद, फल और हल्का-फुल्का खाना, आदि ही ज्यादा खा रही थी। 

हाँ, एक काम उसने ज़रूर start कर दिया था कि उसने अपना ख्याल रखना शुरू कर दिया था, जैसे एक बार beauty parlour में जाकर facial, hair colouring, padicure, manicure करा लिया था।

अब beauty products के साथ homemade product use कर रही थी। हल्की-फुल्की exercise भी कर रही थी, अपना रूप निखारने के लिए...

उधर श्लोक का office से देर से आना और अपने में ही खोए रहना और उसे ignore करना जारी था।

दिन, हफ्ता, महीना बीत गया...

अब तो office में श्वेता के दीवानों ने भी उसके इर्द-गिर्द मंडराना शुरू कर दिया था।

एक दिन श्लोक office से एक घंटा पहले ही घर आ गया, उस दिन श्वेता ने श्लोक की पसंद की red colour की साड़ी पहनी थी और उसके बाल खुले हुए थे, क्योंकि वो उन्हें बांध नहीं पाई थी।

श्लोक, श्वेता को एकटक देखते हुए बोला, बच्चे कहां हैं?

बच्चे तो खेलने गए हैं, कि‌ पापा तो एक घंटा देरी से ही आएंगे।

श्लोक ने श्वेता को बाहों में भर लिया, आहा! क्या बात है madam, बिजली गिरने के mood में हैं। Coffee पीने चलें?

ओह! क्यूं आज आपकी स्नेहा ने coffee पीने से मना कर दिया था, जो जल्दी चले आए और coffee पीने चलने की बात कर रहे हो... श्वेता ने श्लोक की बाहों से छिटक कर बोला...


आगे पढ़ें, प्यार पर घात (अंतिम भाग) में…

Wednesday, 25 June 2025

Story of Life : प्यार पर घात (भाग-3)

उसे श्लोक की jeans में एक गुलाबी, खूशबूदार काग़ज़ और एक दस का सिक्का मिला।

काग़ज़ को पढ़कर श्वेता के पैरों तले जमीन खिसक गई...


प्यार पर घात (भाग-1) और

प्यार पर घात (भाग-2) के आगे…

प्यार पर घात (भाग-3)


आह! यह क्या?

उसने बहुत बार उस कागज़ को पढ़ा, पर हर बार स्नेहा से प्रेम अनुरोध ही दिखा...


“प्रिय स्नेहा 

तुम इतनी सुन्दर हो, कि न चाहते हुए भी तुमसे स्नेह हो जाता है। श्वेता की बेडोल figure के आगे, तुम्हारी figure तो कमाल की है। उसके साथ रहते हुए मेरी जिंदगी नीरस हो गई है। उसके साथ कहीं बाहर निकलने का भी मन नहीं करता, कौन drum के साथ घूमने जाए। अगर तुम्हें ऐतराज़ न हो, तो ज्यादा नहीं, बस क्या शाम के कुछ घंटे मुझे दे सकती हो, मेरा प्रेम अनुरोध समझकर...

तुम्हारे स्नेह के प्रति उत्तर में श्लोक...”


आखिर कब और कैसे श्लोक स्नेहा से स्नेह करने लगा? 

तभी उसे याद आया कि एक दिन, जब वो सारे काम खत्म करके श्लोक के पास आई थी, तो उस ने कहा था कि सारे काम निपटा लो, बस मेरा ही मत सोचा करो, कि कभी मेरे पास भी जल्दी आ जाओ...

अरे इतने काम रहते हैं, खत्म ही नहीं होते, कितना भी जल्दी कर लूं। तुम्हारा क्या है, office से आकर खा-पीकर आराम से बिस्तर पर। श्वेता तुनककर बोली...

श्लोक भी भरा बैठा था, इंतजार करते हुए, तो चिढ़कर बोला - तुम भी वही हो, काम भी वही, पर जब अपना ही शरीर बोझ हो, तो काम कैसे जल्दी हो...

श्लोक! चीख पड़ी थी श्वेता।

फिर अपनी तकिया उठाकर सोफे पर जा धंसी थी, पूरी रात रोते-रोते कटी थी... पर श्लोक बेखबर सोता रहा।

ओह! श्लोक बाबू, स्नेहा से दिल लगा बैठे थे, तभी मुझे जलीकटी सुना रहे थे...

हाय! अब मेरा और मेरे बच्चों का क्या होगा, निर्मोही श्लोक पर सारी जवानी तबाह कर दी। अब जैसी वो दिखती है, ऐसे में कौन उसे पूछेगा?

उसने भारी मन से फोन करके office से तीन दिन की छुट्टी ले ली। 

वो पूरे दिन अनमनी सी रही... रो-रोकर उसकी आंखें लाल हो गई थीं...


आगे पढ़ें, प्यार पर घात (भाग-4) में…