Monday, 9 June 2025

Article : Chenab Railway Bridge - The High Rise India

कश्मीर में चिनाब नदी के ऊपर बना, Chenab Railway Bridge, विश्व का सबसे ऊंचा bridge है।

इस bridge के बनने से कश्मीर पूरे देश से जुड़ गया।

कश्मीर को पूरे भारत से जोड़ने का सपना, अंग्रेजों के समय से देखा जा रहा था।

ऐसा नहीं है कि इसे बनाने की कोशिश नहीं की गई, पर सपना, सपना ही बना रहा, क्योंकि इसे पूरा कैसे किया जाए, यह सोच पाना भी मुश्किल था।

Chenab Railway Bridge - The High Rise India


2003 में कांग्रेस सरकार ने चिनाब रेलवे पुल बनवाने का कार्य शुरू कराया, जो 2009 तक पूरा हो जाना था, मगर तेज़ हवाओं के चलते ऐसा हो न सका। उसके बाद यह project लगभग ठप पड़ गया।

2014 में मोदी जी ने इसका परीक्षण किया और आवश्यक fund release कराया। Chenab railway bridge का कार्य शुरू हुआ। इस पुल को बनाने में 1486 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

काम बहुत ही कठिन और लगभग असम्भव था।

मगर अगर इरादे हों बुलंद और मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो, तो तेज़ हवाएं भी पथ नहीं रोकती हैं।

काम शुरू हुआ और बेहद उम्दा प्रदर्शन के साथ हमारे engineers अपने काम पर लग गए और पुल निर्माण संभव हो गया।

आपको अगर उस पूरे process को देखना है, तो आपको उसके video internet पर मिल जाएंगे।

जब आप उसे देखेंगे, तो आप पाएंगे कि भारत technology में बहुत आगे निकल गया है। उसी का परिणाम है chenab railway bridge, जो अपनी विशेषताओं से भरा हुआ है।


I) Strength :

इसमें 30000 metric tons (3 crore kgs) steel लगा, जिसमें SAIL (Steel Authority of India Limited) ने 16000 (1.6 crore kgs) metric tons steel supply किया है। SAIL की ओर से तैयार TMT and steel plate को दुनिया भर में excellent quality वाला माना जाता है। इससे यह बहुत ही strong and durable बना है।


II) Resistance to :

• Earthquakes -

इसमें इस तरह के shockers लगाए गए हैं कि यह richter scale पर magnitude 8 तक का भूकंप आने पर भी सुरक्षित रहेगा।


• Contact blast (explosion) -

40 metric tons के बम धमाके होने पर भी यह सुरक्षित रहेगा।


• Wind -

266 km/h की wind-speed होने पर भी यह सुरक्षित रहेगा।


• Temperature -

-20°C जैसे freezing तापमान पर भी यह सुरक्षित रहेगा। 


III) Height :

इसकी height समुद्र तल से 359 metres है। यह Eiffel Tower (300 metres) और Statue of Unity (182 metres) से भी बहुत लंबा है।

इसे विश्व का सबसे ऊंचा bridge कहा जा रहा है, क्योंकि यह चीन और अमेरिका में मौजूद tallest bridges से भी ऊंचा है।


IV) Arch :

इसका arch 467 metres का है, जो कि विश्व में अब तक के किसी भी bridge के arches में सबसे बड़ा है।


V) Length :

इस rail bridge की length 1315 metres है।


VI) Durability :

Experts and researchers का मानना है कि जिस मजबूती के साथ यह बनाया गया है, 120 साल तक यह मजबूती से टिका रहेगा।


भारत में Chenab railway bridge का निर्माण, विश्व में हमारे देश को नये आयाम, नयी ऊंचाई पर ले गया है, या यूं कहें कि Chenab railway bridge India का high rise है।

इस project को IISc. Bengaluru की professor माधवी लता and team ने पूरा किया है।

भारत को एक और विश्वव्यापी सफलता के लिए बहुत सारी बधाइयां। हमारा देश यूं ही ‘दिन दूनी रात चौगुनी’ तरक्की करें और विश्व विजेता कहलाए।

जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳 

Sunday, 8 June 2025

Article : D Gukesh की गुरु दक्षिणा

Norway Chess (Open) में भारतीय खिलाड़ी, D Gukesh ने world no.1 player Magnus Carlsen को उनके ही देश Norway में classical chess tournament के 6th round में हराकर, अपने गुरु विश्वनाथन आनंद को गुरु दक्षिणा में अपनी जीत प्रदान की।

किसी भी गुरु के लिए इससे बड़ी गुरु दक्षिणा कुछ नहीं हो सकती है, कि जिस के कारण उसका अधिपत्य समाप्त हुआ हो, उसका शिष्य उसे ही हराकर आए।

क्या मतलब? 

D Gukesh की गुरु दक्षिणा


दरअसल 2007 से 2012 तक भारत के विश्वनाथन आनंद शतरंज के विश्व विजेता रहे। 2013 की world championship में उनका match Carlsen से हुआ, और उसने उस tournament में जीत हासिल कर विश्व विजेता के खिताब पर अपना नाम लिख दिया।

Norway Chess (Open) में विश्वनाथ आनंद के शिष्य गुकेश‌‌ ने Carlsen को उसके ही देश में हराकर, उसके निर्विवाद जीत को पूर्ण नहीं होने दिया।

मानो कह दिया, जैसे आपने मेरे गुरु से खिताब जीता था, आज मैंने आपको हराकर उन्हें गुरु दक्षिणा दे दी।

इससे Carlsen का यह घमंड चूर-चूर हो गया कि उसे कोई हरा नहीं सकता है। वो इस हार से इतना बैचेन हो उठा कि उसने यह तक कह दिया कि classical chess वो छोड़ देगा।

एक और घटना ऐसी हुई, जो भविष्य की ओर संकेत कर रही थी।

दरअसल Carlsen 6th round में जब गुकेश से हार गया तो उससे हार बर्दाश्त नहीं हुई और उसने गुस्से में जोर से एक मुक्का playing board की table पर मारा।

उसके मुक्का मारने से उस समय chess board पर Carlsen के जितने pieces थे, सब गिर गये। खड़े रहे तो गुकेश के king, knight and pawn...

और वो king piece मानो कह रहा हो, अब बहुत जल्द बादशाहत बदलने वाली है, और एक बार साम्राज्य फिर से भारतीयों का होने वाला है।

हम सब भारतवासियों के लिए बहुत गर्व की बात है कि हमारा 19 वर्षीय लाडला खिलाड़ी गुकेश जीत पर जीत हासिल करता जा रहा है।

गुकेश को उसकी जीत पर बधाइयाँ...

गुकेश की जीत का श्रेय, उसके खेल के प्रति उसका रवैया है, जिसकी तारीफ खुद Carlsen ने भी की है :

“गुकेश लड़ता है, और लड़ता है,और लड़ता है, चाहे स्थिति कितनी भी खराब क्यों न हो।”

 

डी. गुकेश से मिली करारी हार के एक दिन बाद Carlsen ने कहा कि मौजूदा विश्व champion की “ऊर्जा” (energy) और “लड़ाकू गुणों” (fighting quality) ने उन्हें जीत दिलाई़...

जिस भी किसी इंसान में अपने काम के प्रति यह रवैया रहेगा, उस को सफलता शत-प्रतिशत मिलेगी ही मिलेगी।

Norway Chess (Open) कल समाप्त हो गई, Carlsen का last match भारत के Arjun Erigaisi से था, और Carlsen के इस match में भी तोते उड़ गए। काफ़ी जद्दोजहद के बाद match draw ही हो पाया, जबकि armageddon match में win point Arjun को ही मिला।

Open category में last match में अगर गुकेश जीत जाता, तो tournament अपने नाम कर सकता था। काश‌! ऐसा होता, तो वो Norway Chess (Open) अपने नाम कर लेता, पर‌ ऐसा हो नहीं सका। कोई बात नहीं, better luck next time...

इस बार की एक जीत से Carlsen का घमंड टूट गया है और उसका confidence हिल गया है, अगली बार पूरी tournament ही Indians जीत लेंगे।

Norway Chess की open category और women's category, दोनों formats में total 4 Indian players थे।

Open category में गुकेश 3rd position और अर्जुन 5th position पर आया, वहीं women's category में Koneru Humpy 3rd position पर और Vaishali Rameshbabu 5th position पर आई...

यह एक बड़ी tournament थी और इसमें दोनों formats में Indian players का झंडा गाड़ देना, अपने आप में बड़ा achievement है।

सभी खिलाड़ियों को उनकी सफलताओं के लिए अनेकानेक बधाइयां...

जीत ऐसे ही भारत के हिस्से में आती रहे, और भारत का परचम हमेशा सर्वोपरि स्थान के लिए लहराता रहे 🙏🏻 

जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳 

Friday, 6 June 2025

Article : राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा

कल एक बार पुनः अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन किया गया।

बहुत से लोगों के मन में यह विचार आ रहा था कि प्राण प्रतिष्ठा तो हो चुकी थी, तो एक बार पुनः क्यों?

बार-बार प्राण प्रतिष्ठा... यह क्या लगा रखा है?

राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा


पहले प्राण प्रतिष्ठा प्रभु श्री राम के बाल रूप रामलला की हुई थी और अब राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन किया गया‌ है। 

अर्थात प्रभु श्री राम के पहले बालरूप की और अभी उनके राजा रामचंद्र के स्वरूप की स्थापना की गई है।

एक ही मंदिर में एक ही मूर्ति की बार-बार प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जाती है, पर अलग-अलग मूर्ति होने से एक से अधिक बार एक ही मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की जा सकती है।

वैसे हम अपने जीवन से जुड़े कितने ही आयोजन को बहुत बार करते हुए भी हर्षित होते हैं, फिर ईश्वरीय आयोजन तो जितनी बार भी हों, उतना ही अच्छा, उतना ही हर्ष और उतनी ही उनकी कृपा वर्षा...

फिर मन‌ में किसी भी तरह की शंका का विचार क्यों?

चलिए, इस भव्य आयोजन से प्रेमपूर्वक जुड़ जाएं...

मंदिरों में आए दिन भव्य आयोजन का कार्यक्रम होते रहना चाहिए।

कल गंगा दशहरा था, अतः बहुत ही शुभ मुहूर्त था या एक अभिजीत मुहूर्त था, जिसमें उत्तर प्रदेश के आदरणीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्राण प्रतिष्ठा का पुन्य कार्य सम्पन्न किया। 

यह कार्यक्रम 3 से 5 जून के बीच संपन्न हुआ, जिसमें मुख्य कार्यक्रम 5 जून को किया गया, जब सभी देवी-देवता अपने-अपने भवन में विराजमान किए गए।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में माहौल भक्तिमय हो चुका था। राम मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के साथ अन्य 7 देवालयों में देवी-देवताओं की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा का अनुष्ठान किया गया था। इन 7 देवालयों को फूलों से सजाया गया और बाहरी हिस्से बिजली की सजावट से जगमग हो रहे थे। स्वर्ण जड़ित शिखर कलश चमक रहे थे।

पूरा अयोध्या ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो पुनः रामराज्य स्थापित हो गया हो, जो एक स्वार्गिक सुख प्रदान कर रहा था।

मंगलवार सुबह 6:30 बजे से प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान शुरू हो गए थे। यह पूजा-पाठ अगले 12 घंटे तक जारी रही। 101 पुजारियों ने इस दौरान 1975 मंत्रों का पाठ किया। अग्नि देवता को आहूति दी, साथ ही, मूर्तियों के शुद्धिकरण की विधि को भी पूरा कराया गया, इस प्रकार से पूजन विधि को संपन्न कराया गया।

मंदिर के पहले तल पर स्थित भव्य रामदरबार और गर्भगृह के चारों कोनों में बने परकोटे के सात अन्य मंदिरों में भी प्राण प्रतिष्ठा की गई।


प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में जिन देवी-देवताओं की मूर्तियों की प्रतिष्ठा की गई :

  • राम दरबार
  • शिवलिंग
  • गणपति जी 
  • हनुमान जी
  • सूर्य देव
  • देवी भगवती
  • माँ अन्नपूर्णा 


राम दरबार (प्रभु श्री राम, माता जानकी, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, भक्त शिरोमणि हनुमानजी) के अलावा, प्रथम पूज्य गणेश जी, श्री राम जी के आराध्य भगवान महादेव (शिवलिंग, जिसे नर्मदा नदी से लाया गया है), प्रभु श्री राम सूर्यवंशी थे, अतः सूर्य देव, शक्ति स्वरूपा माँ भगवती और माँ अन्नपूर्णा  उपस्थित हैं।

आपकी जिसमें श्रद्धा है, उन सबकी पूजा कर राम मंदिर से संतुष्ट होकर लौट सकते हैं।

अयोध्या, जो अभी तक रामजन्म भूमि के रूप में स्थापित था, अपनी पूर्णता को प्राप्त कर सम्पूर्ण रामराज्य में परिवर्तित हो गया। 

राम मंदिर, जो पूर्व में ही अपनी दिव्यता और भव्यता से परिपूर्ण था, उसमें गंगा दशहरा के विशेष पर्व के दिन हुई राम दरबार व अन्य 7 देवालयों की प्राण प्रतिष्ठा उसे पावनता के उत्कृष्ट आयाम पर ले गयी है।

अगर आप अभी तक राममंदिर के दर्शन करने नहीं पहुंच पाए हैं, तो शीघ्र वहां जाने की तैयारी करें, अयोध्या में राममंदिर के दर्शन मानो साक्षात ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति...

जय श्री राम 🚩